motivational spiritual stories- pittar dosh


Motivational spiritual stories- Pittar Dosh

पित्तर दोष 


motivational spiritual stories- pittar dosh
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एक दिन कबीर जी के गुरु जी  ने कबीर जी से कहा कि ,"श्राद्ध आने वाले हैं , मैं अपने  पित्तरों  को भोजन करवाना चाहता हूॅं ,तुम बाजार  जाओ और खाने-पीने  की आवश्यक वस्तुओं  का इन्तज़ाम करो। कबीर जी ने अपने गुरु जी  का दिया आदेश माना और तुरन्त बाजार की और चल दिए, रास्ते में उन्होंने एक मरी हुई गाय देखी। कबीर जी ने मरी हुई गाय  के सामने हरी घास रख दी और खुद वहां उसके पास ही बैठ गए।

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काफी समय बीत जाने के बाद कबीर जी के गुरु जी  ने सोचा कि  कबीर अभी तक क्यों नहीं आया। वे कबीर जी की तलाश इधर उधर करने लगें कि रास्तें में एक आदमी ने उन्हें हस्ते हुए बताया कि  कबीर जी तो एक मरी हुई गाय  को घास खिलाने की कोशिश कर रहे है। उन्होंने गाय  के सामने हरी घास डाल दी और बैठ कर  गाय के  उठने का इंतज़ार कर रहे हैं ,वे बोल रहे थे जब ये उठेंगी और घास खाएंगी, फिर में इसका दूध  लेकर चला जाउंगा। ये सुनते ही कबीर जी के गुरु जी  को बहुत गुस्सा आया। वे गुस्से में कबीर जी जहां बैठे थे, वहां गए और पूछा," कबीर तुम  यहाँ क्या कर रहे हो"।

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"मैंने तुमको गाय  का दूध  और बाकी खाने-पीने  की साम्रगी के लिए भेजा था, तुम इस मरी हुई गाय  को घास कैसे खिलाओंगे, बताओ मुझे ", तब कबीर जी ने कहा ,"गुरु   जी  ,जो गाय आज मरी है ,आप कह रहे हो कि मैं उसे घास नहीं खिला सकता। लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आता कि  सैंकड़ों वर्ष पहले मरे हुए पूर्वज जिसे आप पित्तर  बताते हो उन्हें भोजन कैसे कराओंगे,  इस प्रश्न का उत्तर सुन कबीर जी के गुरु  जी भी अचंभित हो गए क्योंकि उनके पास कबीर जी के तर्क का कोई समाधान नहीं था, वे शर्मिंदा हो गए । क्योंकि ये बात तो  बिल्कुल सत्य थी, कि जो प्राणी मर चुका है वो इंसान हो या जानवर उसे खाना खिलाना असंभव होता है।हम प्रथाओं को बिना जाने बस निभाए जा रहे है कभी समझने की कोशिश ही नहीं करते कि क्या ये सही भी है कि नहीं।

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ये कहानी हमें शिक्षा देती है, कि हमारे पूर्वजों के द्वारा बनाई ऐसी तमाम  प्रथाएं  जिनका वास्तविक जीवन से कोई तात्पर्य नहीं होता है, फिर भी चली आ रही है  इन्ही परम्परयों  के कारण ,हम को उन्हें मानना पड़ता है ,पर ज्ञान कहता है कि परमात्मा से बड़ा कोई नहीं और न ही कोई हो सकता है सो प्रथा होनी चाहिए सिर्फ उसको ध्याने की, नाम सिमरन की और जब आप इसे जी जान से  निभाओगे तभी मोक्ष का मतलब समझ पाएंगे क्योंकि इसका फ़ायदा न सिर्फ आपको मिलेगा बल्कि आपकी आने वाली पीढ़ियाँ भी इस नाम रूपी  सरोवर में डुबकी लगा धन्य हो जाएँगी  ।



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