Mothers day 2019 | कब, कैसे और क्यों शुरू हुआ मदर्स डे | NATURE MANTRA Hindi

Mothers day 2019 : कब, कैसे और क्यों शुरू हुआ मदर्स डे 

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Mothers Day 2019: माँ दुनिया के हर रिश्ते से ऊपर है माँ और बच्चों के प्यार का रिश्ता। माँ से प्यार का अटूट रिश्ता जिसे हर साल मई के दूसरे रविवार को हर देश में Mothers day के रूप में मनाया जाता है। लेकिन हर देश में इसे मनाये जाने की अलग परम्परा और अलग ही कहानी है तो आईये जानते है Mothers Day के बारे में विस्तार से। 

कुछ विद्वानों का मानना है कि माँ का प्यार या माँ से प्यार का रिश्ता एक सम्मान की परम्परा है जिसमें माँ को सम्मान दिया जाता था या उसकी उस दिन पूजा की जाती थी इस की शुरुआत ग्रीस से हुई जहा स्य्बेले ग्रीक देवताओं की माँ थी जिसकी वो पूजा करते थे। उसी की याद में वो इस दिन को मनाते थे मदर्स डे के रूप में। 

यूरोप और ब्रिटेन में भी मदर्स डे को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। मदर संडे फेस्टिवल लितुर्गिकल कैलेंडर का एक हिस्सा है। इस कैथोलिक कैलेंडर  में लेतारे संडे ,वर्जिन मैरी और मदर्स चर्च खूब प्रचलित परम्पराएं है जिनका वो अभी भी पालन कर रहे है। इस दिन सभी अपनी माओं के सारे काम खुद करते है और उन्हें उपहार देकर सन्मान देते है। 

अमेरिका में मदर्स डे की शुरुआत जूलिया वार्ड हॉवे द्वारा 1870 में की गयी थी। अपनी एक बुक "मदर डे प्रोक्लामेशन "  में जूलिया ने अमेरिकन सिविल वॉर में हुई मारकाट सम्बन्धी अपनी  शांतिपूर्ण प्रतिकिरिया दी थी।  उसकी इस बुक में जूलिया ने  नारी के राजनितिक स्तर पर आने  और इसे आकर देने के लिए मदर और नारी को प्रोत्साहित किया था। 

विभिन्न देशों में मदर्स डे अलग अलग कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है। जापान में  इस दिन को वहां के लोग रानी के जन्मदिन के रूप में मनाते है वो उपहार स्वरूप उन्हें गुलाब के फूल देते है और इस दिन को रानी को माँ  में मनाते है। चीन में मातृत्व दिवस का बहुत महत्व है क्योंकि इस दिन गुलनार के फूलों की खूब डिमांड होती है। थाईलैंड में भी सभी इस दिन रानी के जनम दिवस के रूप में मनाते है वही भारत में इसे कस्तूरबा गाँधी के सम्मान के रूप में मनाया जाता है। 



इतिहास चाहे जैसा भी हो पर माँ का महत्त्व बच्चों से ज़्यादा कोई नहीं समझ सकता चाहे बच्चा अमीर हो या गरीब बच्चों के लिए एक माँ "माँ "ही होती है। माँ एक ऐसा किरदार है जो भगवान ने अपनी कमी को पूरा करने के लिए रचा है इस लिए तो माँ को भगवन का रूप भी कहते है। एक नारी ही सभी पत्नियों का, बहनों का और  मायों का किरदार निभाती है। बिन माँ के ये जीवन ऐसा है जैसे बिन हवा के जीवन। 



औरत की अहमियत को समझे। एक औरत के बिना घर नहीं होता। ज़रुरत है इस किरदार को सम्मान देने की। एक दिन उस माँ को समर्पित कीजिये उसे प्यार और उपहार दे उसका ऋण उतारने की कोशिश करे। सभी माओं के लिए ये एक ख़ुशी का पल होता है जब उसके अपने उसे आराम दे उसकी अहमियत को समझते  है। आप भी ज़रूर अपनी माँ को उपहार और सम्मान दे इस पर्व की गरिमा को बनाये रखे। 

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